
मुख्य बातें
- विजयादशमी (दशहरा) 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है, शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी (दोनों 19 अक्टूबर) के अगले दिन।
- विजय मुहूर्त लगभग दोपहर 1:59 से 2:45 बजे (IST) है; शहर के अनुसार समय बदलता है।
- शक्ति उपासकों के लिए यह महिषासुर पर देवी की विजय का उत्सव और नवरात्रि उपासना की पूर्णता है।
- यह भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का भी दिन है, जो उन्होंने माँ के आशीर्वाद से प्राप्त की।
- पारंपरिक अनुष्ठानों में अपराजिता पूजा, शमी पूजन, नवरात्रि पारण और विसर्जन शामिल हैं।
- इसका गहरा अर्थ है बुराई पर अच्छाई की, और अपने भीतर की नकारात्मकता पर स्पष्टता की विजय।
माँ भगवती की नौ रातों की भक्ति के बाद आता है दसवाँ दिन: विजयादशमी, "विजय की दशमी"। अधिकांश लोग इसे दशहरा के नाम से जानते हैं, जब उत्तर भारत में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। पर शक्ति उपासकों के लिए इसका उतना ही महत्वपूर्ण एक और अर्थ है: यह वह दिन है जब माँ की विजय का उत्सव मनाया जाता है और नवरात्रि की उपासना पूर्ण होती है।
इस लेख में जानिए देवी भक्तों के लिए विजयादशमी का महत्व, इसके अनुष्ठान, और भारत व विदेश के परिवारों के लिए 2026 की तिथि और समय।
विजयादशमी 2026: तिथि और समय
| विषय | तिथि और समय (IST) |
|---|---|
| शारदीय नवरात्रि आरंभ | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 |
| अष्टमी और नवमी | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 |
| विजयादशमी (दशहरा) | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 |
| विजय मुहूर्त | लगभग दोपहर 1:59 – 2:45 |
| रावण दहन | सूर्यास्त के बाद, स्थानीय परंपरा के अनुसार |
समय अनुमानित है और शहर के अनुसार बदलता है। किसी भी पूजा के लिए सटीक मुहूर्त आचार्य से पुष्टि करें।
दो कथाएँ, एक संदेश
देवी की विजय
देवी माहात्म्य के अनुसार, भैंसे के रूप वाले असुर महिषासुर को देवता भी पराजित नहीं कर सके। तब देवताओं की सम्मिलित शक्ति से माँ दुर्गा प्रकट हुईं, जिन्होंने नौ दिन और रात युद्ध कर दसवें दिन उस पर विजय पाई। नवरात्रि उन नौ रातों की आराधना है; विजयादशमी उस विजय का उत्सव है।
भगवान श्रीराम की विजय
परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण से अंतिम युद्ध से पहले देवी की आराधना की और विजयादशमी के दिन विजयी हुए। इसीलिए रामलीला का समापन रावण दहन से होता है।
दोनों कथाओं का संदेश एक है: माँ की कृपा से धर्म अधर्म पर विजय पाता है।
शक्ति उपासकों के लिए विजयादशमी का अर्थ
देवी भक्तों के लिए विजयादशमी: - कलश स्थापना से आरंभ हुई नवरात्रि साधना को पूर्ण करती है - धर्म की रक्षा करने वाली माँ की शक्ति का उत्सव है - विसर्जन का दिन है, जब नवरात्रि में पूजित माँ के स्वरूप को आदरपूर्वक विदा किया जाता है - नवरात्रि व्रत रखने वालों के लिए पारण का दिन है - नई विद्या, कार्य या शुभ आरंभ के लिए शुभ दिन माना जाता है
माँ बगलामुखी के भक्तों के लिए यह नवरात्रि उपासना के लिए धन्यवाद देने और आने वाले महीनों के लिए स्थिरता और स्पष्टता की प्रार्थना का दिन है।
विजयादशमी के पारंपरिक अनुष्ठान
| अनुष्ठान | विवरण |
|---|---|
| अपराजिता पूजा | "अपराजित" देवी अपराजिता की पूजा, परंपरागत रूप से अपराह्न में |
| शमी पूजन | शमी वृक्ष की पूजा; महाभारत में पांडवों ने वनवास के समय अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे |
| शस्त्र पूजा / आयुध पूजा | औज़ार, वाद्य, पुस्तकें और वाहन को कर्म के साधन मानकर पूजना |
| सीमोल्लंघन | परंपरागत रूप से गाँव की सीमा पार करना; प्रतीकात्मक रूप से अपनी सीमाओं से आगे बढ़ना |
| नवरात्रि पारण | नवरात्रि व्रत खोलना |
| विसर्जन | कलश जल, जवारे या देवी प्रतिमा का आदरपूर्वक विसर्जन |
| पत्तों का आदान-प्रदान | महाराष्ट्र और दक्षिण के कुछ भागों में आपटा या शमी के पत्ते "सोना" मानकर बाँटे जाते हैं |
क्षेत्रीय परंपराएँ
- उत्तर भारत: रामलीला और रावण दहन
- पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत: दुर्गा पूजा का समापन बिजोया दशमी, विसर्जन और सिंदूर खेला के साथ
- कर्नाटक: शाही मैसूर दसरा शोभायात्रा
- केरल और दक्षिण के कुछ भाग: विद्यारंभम, जब छोटे बच्चों को अक्षर-ज्ञान आरंभ कराया जाता है
- गुजरात: गरबा की अंतिम रात के बाद दशहरे का उत्सव
- मध्य प्रदेश: रामलीला, रावण दहन और देवी मंदिरों में नवरात्रि विसर्जन

"विजय" का आंतरिक अर्थ
विजय का अर्थ है जीत, पर परंपरा सिखाती है कि सबसे बड़ी विजय भीतर की होती है। रावण के दस सिरों को प्रायः दस आंतरिक दुर्बलताओं के रूप में समझाया जाता है:
| आंतरिक दुर्बलता | उसका विपरीत गुण |
|---|---|
| काम (वासना) | संतोष |
| क्रोध | शांति |
| लोभ | उदारता |
| मोह | स्पष्टता |
| मद (अहंकार) | विनम्रता |
| मत्सर (ईर्ष्या) | सद्भावना |
| स्वार्थ | सेवा |
| अन्याय | न्यायप्रियता |
| अमानवता (क्रूरता) | करुणा |
| अहंकार | समर्पण |
माँ बगलामुखी के भक्तों के लिए स्तंभन अर्थात् स्थिरता की शक्ति यहाँ विशेष अर्थ रखती है: क्रोध, कठोर वाणी और भ्रम को शांत करना अपने आप में एक विजय है।
घर पर विजयादशमी की सरल पूजा
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें; चाहें तो लाल या पीले।
- माँ के चित्र और नवरात्रि कलश के सामने घी का दीपक जलाएँ।
- फूल, कुमकुम, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
- अपराजिता प्रार्थना: उपलब्ध हों तो नीले फूल अर्पित करें और धर्म की रक्षा व शक्ति के लिए प्रार्थना करें।
- अपने कर्म-साधनों का सम्मान: पुस्तकें, लैपटॉप या औज़ार वेदी के सामने फूल और तिलक के साथ रखें।
- परिवार के साथ आरती।
- विसर्जन: पारिवारिक परंपरा के अनुसार कलश और जवारे का आदरपूर्वक विसर्जन।
- पारण: प्रसाद से नवरात्रि व्रत खोलें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें, और कोई नया शुभ कार्य आरंभ करें।
नए आरंभ के लिए शुभ दिन
विजयादशमी को परंपरागत रूप से ऐसा दिन माना जाता है जब अलग से मुहूर्त निकाले बिना भी नए कार्य का आरंभ शुभ होता है:
| आरंभ | परंपरा |
|---|---|
| विद्या | छोटे बच्चों का विद्यारंभ; नया पाठ्यक्रम, वाद्य या भाषा सीखना |
| कार्य | नई दुकान या कार्यालय खोलना; नई परियोजना |
| ख़रीदारी | वाहन, सोना या घरेलू वस्तुएँ |
| साधना | दैनिक जप या नए स्तोत्र का पाठ आरंभ |
| यात्रा | तीर्थयात्रा पर प्रस्थान |
गृहप्रवेश या बड़े व्यवसाय के शुभारंभ जैसे बड़े कार्यों के लिए आचार्य फिर भी सटीक समय देख सकते हैं।
विदेश में रहने वाले भक्तों के लिए समय
20 अक्टूबर 2026 को लगभग दोपहर 1:59–2:45 (IST) का विजय मुहूर्त विदेश में:
| शहर | स्थानीय समय |
|---|---|
| न्यूयॉर्क / टोरंटो (EDT) | लगभग सुबह 4:29–5:15, मंगलवार 20 अक्टूबर |
| शिकागो (CDT) | लगभग सुबह 3:29–4:15 |
| लॉस एंजेलिस / वैंकूवर (PDT) | लगभग रात 1:29–2:15 |
| लंदन (BST) | लगभग सुबह 9:29–10:15 |
विदेश के अधिकांश परिवार अपने स्थानीय मंगलवार को सुबह या शाम घर पर पूजा करते हैं। भारत में पूजा करा रहे हों, तो भारतीय समय पर वीडियो से जुड़ सकते हैं।
विदेश में बच्चों के साथ विजयादशमी
- माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की कथाएँ सरल शब्दों में सुनाएँ
- काग़ज़ का छोटा रावण बनाएँ और "दस सिरों" को उन आदतों के रूप में समझाएँ जिन्हें हम छोड़ना चाहते हैं
- उनकी स्कूल की पुस्तकें वेदी पर फूल और तिलक के साथ रखें
- स्थानीय मंदिर या सामुदायिक दशहरा उत्सव में जाएँ
- भारत में दादा-दादी, नाना-नानी को फ़ोन कर आशीर्वाद लें
माँ बगलामुखी के भक्त और विजयादशमी
नवरात्रि में माँ बगलामुखी की उपासना करने वालों के लिए विजयादशमी कृतज्ञता का दिन है। अनेक भक्त अर्पित करते हैं: - नौ दिनों के लिए धन्यवाद स्वरूप घी का दीपक और पीले फूल - स्तोत्र या चालीसा का संक्षिप्त पाठ - परिवार और पड़ोसियों में बाँटने के लिए पीला प्रसाद - पूरे वर्ष एक छोटी दैनिक साधना जारी रखने का संकल्प
इन गलतियों से बचें
- विसर्जन या पारण के बिना नवरात्रि समाप्त करना; उपासना आदरपूर्वक पूर्ण करें।
- कलश जल या जवारों को असावधानी से फेंकना; पारिवारिक परंपरा के अनुसार आदर से विसर्जन करें।
- "विजय" को लोगों को हराना समझना; यह पर्व धर्म और आंतरिक विजय का उत्सव है।
- नौ दिन के व्रत के तुरंत बाद भारी भोजन।
- दिन को जल्दबाज़ी में बिताना; माँ के साथ कुछ शांत क्षण अवश्य बिताएँ।
आचार्य आशीष शर्मा के बारे में
आचार्य आशीष शर्मा 25 वर्षों से अधिक समय से माँ बगलामुखी की परंपरा में सेवा कर रहे हैं। वे संस्कृत में प्रशिक्षित हैं और जन्म से इस परंपरा से जुड़े हैं। उनका कार्यालय माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा के पास है। वे पारंपरिक माँ बगलामुखी पूजा, हवन और विशेष अनुष्ठान करते हैं, और भारत तथा विश्वभर के परिवारों को उनकी परिस्थिति के अनुसार व्यक्तिगत आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में विजयादशमी (दशहरा) कब है?
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को।
दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त क्या है?
लगभग दोपहर 1:59 से 2:45 बजे (IST)। शहर के अनुसार थोड़ा बदलता है।
देवी भक्तों के लिए विजयादशमी क्यों महत्वपूर्ण है?
यह महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय का उत्सव है और विसर्जन व पारण के साथ नवरात्रि उपासना को पूर्ण करती है।
अपराजिता पूजा क्या है?
"अपराजित" देवी अपराजिता की पूजा, जो विजयादशमी के अपराह्न में शक्ति और धर्म की रक्षा के लिए की जाती है।
दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों होती है?
महाभारत में पांडवों ने वनवास के समय अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे। विजयादशमी पर शमी को शुभ मानकर पूजा जाता है।
क्या विजयादशमी नया कार्य आरंभ करने के लिए शुभ है?
हाँ। परंपरा में इसे विद्या, कार्य और नए शुभ आरंभ के लिए शुभ दिन माना जाता है।
अमेरिका और ब्रिटेन में विजय मुहूर्त का समय क्या है?
20 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क व टोरंटो में लगभग सुबह 4:29–5:15, और लंदन में लगभग सुबह 9:29–10:15।
नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?
परंपरागत रूप से विजयादशमी को, या पारिवारिक परंपरा और आचार्य के परामर्श के अनुसार।
