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मंत्र, स्तोत्र और भक्ति

बगलामुखी गायत्री मंत्र: अर्थ सहित

मुख्य बातें

  • बगलामुखी गायत्री पारंपरिक तीन पंक्तियों वाले गायत्री स्वरूप में है: "हम जानें… हम ध्यान करें… वे हमें प्रेरित करें"।
  • सबसे प्रचलित पाठ: "ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥"
  • अर्थ में यह माँ बगलामुखी को जानने, उनकी स्थिरता की शक्ति पर ध्यान करने और उनसे प्रेरणा पाने की प्रार्थना है।
  • यह भक्ति-मंत्र है; मूल मंत्र और निश्चित संख्या की साधना गुरु के मार्गदर्शन में ही की जाती है।
  • प्रातःकाल, गुरुवार, अष्टमी और नवरात्रि इसके जप के लिए विशेष उपयुक्त समय हैं।
  • जप भक्ति का कार्य है; इससे किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं होती।

अधिकांश हिंदू ऋग्वेद के महान गायत्री मंत्र को जानते हैं, जो दिव्य प्रकाश स्वरूप सविता देव को समर्पित है। समय के साथ इसी सुंदर तीन पंक्तियों वाले स्वरूप में अनेक देवी-देवताओं के गायत्री मंत्र रचे गए। हर एक उस देवता को जानने, उन पर ध्यान करने और उनसे प्रेरणा पाने की एक छोटी-सी प्रार्थना है।

यह लेख बगलामुखी गायत्री मंत्र को समझाता है: इसके शब्द, अर्थ, उच्चारण, और इसे भक्ति-भाव से कैसे जपें।

"गायत्री" मंत्र क्या होता है?

गायत्री चौबीस अक्षरों वाले एक वैदिक छंद का नाम है, जिसमें आठ-आठ अक्षरों की तीन पंक्तियाँ होती हैं। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं…) इसी छंद में रचा गया है।

देवताओं के गायत्री मंत्र एक स्पष्ट क्रम का पालन करते हैं:

पंक्ति क्रम अर्थ
1 [देवता] विद्महे "हम [देवता] को जानें"
2 [गुण] धीमहि "हम [उनके गुण] पर ध्यान करें"
3 तन्नो [देवता] प्रचोदयात् "वे [देवता] हमें प्रेरित करें और मार्ग दिखाएँ"

यही सरल संरचना देवताओं के गायत्री मंत्रों को सीखने में सहज और अर्थ में अत्यंत गहरा बनाती है।

बगलामुखी गायत्री मंत्र

सबसे अधिक जपा जाने वाला स्वरूप यह है:

ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

Om Baglamukhyai cha vidmahe, Stambhinyai cha dhimahi, Tanno Devi prachodayat.

शब्द-दर-शब्द अर्थ

शब्द अर्थ
ॐ आदि नाद; परम सत्य
बगलामुख्यै माँ बगलामुखी के लिए
च और; निश्चय ही
विद्महे हम जानें; हम अनुभव करें
स्तम्भिन्यै उनके लिए जो स्थिरता (स्तम्भन) प्रदान करती हैं
धीमहि हम ध्यान करें
तन्नो वे (देवी) हमें…
देवी देवी
प्रचोदयात् प्रेरित करें, प्रकाशित करें, मार्ग दिखाएँ

सरल शब्दों में अर्थ: "ॐ। हम माँ बगलामुखी को जानें। हम उन पर ध्यान करें, जो स्थिरता प्रदान करती हैं। वे देवी हमें प्रेरित करें और मार्ग दिखाएँ।"

इस प्रार्थना की विनम्रता पर ध्यान दीजिए: यह कोई सांसारिक फल नहीं माँगती। यह उन्हें जानने, उनकी स्थिरता पर ध्यान करने और उनसे मार्गदर्शन पाने की प्रार्थना है। इसीलिए यह दैनिक भक्ति के लिए इतनी उपयुक्त है।

और पढ़ें: स्तम्भन शक्ति: स्थिरता की शक्ति का अर्थ

गायत्री स्वरूप इतना प्रिय क्यों है

हज़ारों वर्षों से गायत्री छंद को हिंदू धर्म में प्रार्थना के सबसे पवित्र स्वरूपों में माना गया है। देवताओं के गायत्री मंत्र वही पवित्रता हर देवता तक पहुँचाते हैं:

  • ये वस्तुएँ नहीं, समझ माँगते हैं। प्रार्थना जानने, ध्यान करने और मार्गदर्शन पाने की है।
  • ये छोटे और पूर्ण हैं। तीन पंक्तियों में भक्त और देवता का पूरा संबंध समाया है।
  • ये देव-परिवार को जोड़ते हैं। गणेश, शिव, विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती और महाविद्याओं, सभी के गायत्री मंत्र हैं, इसलिए भक्त एक क्रम सीखकर सबकी प्रार्थना कर सकता है।
  • ये दैनिक जीवन के अनुकूल हैं। सूर्योदय पर, पढ़ाई से पहले या काम से पहले कुछ ही मिनटों में गायत्री जपी जा सकती है।

उच्चारण कैसे करें

शब्द ऐसे बोलें
ॐ "ओ३म्", लंबा और गूँजता हुआ
बगलामुख्यै "बग-ला-मुख्-यै" ("यै" को स्पष्ट बोलें)
च "च" (छोटा, हल्का)
विद्महे "विद्-म-हे"
स्तम्भिन्यै "स्तम्-भिन्-यै"
धीमहि "धी-म-हि" (पहला "धी" लंबा)
तन्नो "तन्-नो"
देवी "दे-वी"
प्रचोदयात् "प्र-चो-द-यात्" (अंत में "त्" हलंत)

धीरे और समान गति से जप करें। जल्दबाज़ी में 108 बार जपने से बेहतर है स्पष्ट उच्चारण के साथ ग्यारह बार जपना।

बगलामुखी गायत्री का जप कैसे करें

  1. स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें, संभव हो तो पीले।
  2. स्वच्छ आसन पर बैठें, पूर्व की ओर (विशेषकर सूर्योदय पर) या उत्तर की ओर मुख करके।
  3. माँ बगलामुखी के चित्र के सामने, या केवल ज्योति के सामने घी का दीपक जलाएँ।
  4. अपने शब्दों में छोटा-सा संकल्प लें।
  5. छोटी-सी प्रार्थना से भगवान गणेश का स्मरण करें।
  6. गायत्री का जप 11, 21, 27 या 108 बार करें; हल्दी की माला हो तो उस पर गिनें।
  7. एक मिनट मौन बैठें, फिर पीला फूल अर्पित करें और प्रणाम करें।

और पढ़ें: हल्दी की माला · संकल्प क्या है?

सूर्योदय पर छोटी पीली वेदी के सामने हल्दी की माला से जप करता एक भक्त

ऊँचे स्वर में, धीमे या मन में?

परंपरा जप के तीन प्रकार बताती है, और हर एक का अपना महत्व है:

प्रकार विवरण किसके लिए उपयुक्त
वाचिक (ऊँचे स्वर में) इतना स्पष्ट जप कि सुनाई दे आरंभ करने वाले, परिवार के साथ जप, उच्चारण सीखना
उपांशु (धीमे स्वर में) होंठ हिलते हैं, ध्वनि मुश्किल से सुनाई देती है व्यक्तिगत दैनिक साधना
मानसिक (मन में) मन ही मन मौन जप गहरी एकाग्रता; यात्रा में या काम पर

आरंभ करने वाले प्रायः ऊँचे स्वर में शुरू करते हैं, फिर शब्द परिचित हो जाने पर उपांशु जप की ओर बढ़ते हैं। मानसिक जप को प्रायः सबसे सूक्ष्म माना जाता है, पर इसके लिए स्थिर मन चाहिए।

कब जपें

समय क्यों
सूर्योदय गायत्री मंत्र परंपरा से भोर में, प्रकाश के समय, जपे जाते हैं
गुरुवार पीले रंग और गुरु का दिन
अष्टमी तिथि माँ की जयंती अष्टमी को आती है
नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि आदिशक्ति और महाविद्याओं को समर्पित नौ पवित्र रातें
बगलामुखी जयंती माँ का प्राकट्य दिवस
पढ़ाई या महत्वपूर्ण कार्य से पहले स्थिर, स्पष्ट मन के लिए प्रार्थना

और पढ़ें: बगलामुखी पूजा के लिए सबसे अच्छे दिन और मुहूर्त

कितनी बार जपें?

  • प्रतिदिन 11 बार एक सुंदर और निभाने योग्य शुरुआत है।
  • थोड़ी लंबी साधना के लिए 27 या 54 बार।
  • गुरुवार, अष्टमी या पर्व के दिनों में 108 बार (एक पूरी माला)।

संख्या से अधिक नियमितता महत्वपूर्ण है। यदि आप किसी विशेष संकल्प के साथ निश्चित संख्या की साधना करना चाहते हैं, तो पहले अपने आचार्य से बात करें।

गायत्री, बीज, नाम-मंत्र और मूल मंत्र

मंत्र यह क्या है मार्गदर्शन
बगलामुखी गायत्री माँ को जानने, उन पर ध्यान करने और उनसे प्रेरणा पाने की तीन पंक्तियों वाली प्रार्थना भक्ति-भाव से व्यापक रूप से जपी जाती है
बीज ह्लीं माँ का एक अक्षर वाला बीज मंत्र इसकी साधना परंपरा से मार्गदर्शन में की जाती है
नाम-मंत्र ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः सरल नमस्कार भक्ति-जप
मूल मंत्र माँ का प्रधान मंत्र परंपरा से गुरु से प्राप्त किया जाता है; इस साइट पर प्रकाशित नहीं

और पढ़ें: बगलामुखी बीज मंत्र ह्लीं · बगलामुखी मंत्र: अर्थ और मार्गदर्शन · बगलामुखी मंत्र जप के नियम

जप से पहले और बाद में

शुरू करने से पहले: - कुछ साँसों तक शांत बैठें और मन को ठहरने दें। - याद करें कि आप जप क्यों कर रहे हैं: माँ को जानने, स्थिर होने और मार्गदर्शन पाने के लिए। - फ़ोन दूर रखें या साइलेंट पर कर दें।

समाप्त करने के बाद: - कम से कम एक मिनट मौन बैठें। मंत्र की स्थिरता सबसे अधिक इसी समय अनुभव होती है। - हाथ जोड़कर जप देवी को अर्पित करें: "माँ, मैंने जो भी जपा, वह आपको अर्पित है।" - अर्थ की एक पंक्ति, जैसे "वे मुझे मार्ग दिखाएँ", दिनभर साथ रखें और कोई निर्णय लेते समय उसे याद करें।

21 दिन की गायत्री साधना

दिन साधना
1–7 हर सुबह दीपक के साथ 11 बार
8–14 हर सुबह 27 बार; एक बार शब्द-दर-शब्द अर्थ पढ़ें
15–21 हर सुबह 54 या 108 बार; बाद में एक मिनट मौन बैठें
21वाँ दिन पीला प्रसाद अर्पित करें और थोड़ा दान दें

हर दिन एक ही समय और स्थान रखें। यदि कोई दिन छूट जाए, तो बस अगले दिन से जारी रखें।

दैनिक जीवन में गायत्री

विद्यार्थियों के लिए

पढ़ाई से पहले ग्यारह बार गायत्री जपें। मार्गदर्शन और प्रकाश की इसकी प्रार्थना शांत, एकाग्र मन से सीखना शुरू करने का सुंदर तरीका है।

कामकाजी लोगों के लिए

किसी महत्वपूर्ण बैठक या निर्णय से पहले इसे मन में जपें। इसका स्थिरता पर ध्यान आपको प्रतिक्रिया में बहने के बजाय सोच-समझकर उत्तर देने में सहायता करता है।

विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए

गायत्री को गुरुवार शाम की पारिवारिक प्रार्थना का हिस्सा बनाएँ। तीनों पंक्तियाँ अर्थ सहित छापकर वेदी पर रखें, ताकि बच्चे उन्हें सीख सकें।

जप के साथ ध्यान कैसे जोड़ें

गायत्री की दूसरी पंक्ति स्वयं धीमहि, "हम ध्यान करें", कहती है। इसलिए जप के साथ थोड़ा ध्यान जोड़ना इसके भाव के अनुरूप है:

  • जप से पहले: आँखें बंद करके दीपक की स्थिर ज्योति का मन में चित्र बनाएँ। जैसे हवा रुकने पर ज्योति स्थिर हो जाती है, वैसे ही मन को ठहरने दें।
  • जप के दौरान: हर पंक्ति के साथ उसके अर्थ को हल्के से मन में रखें। "विद्महे" पर माँ को जानने की इच्छा, "धीमहि" पर उनकी स्थिरता का भाव, और "प्रचोदयात्" पर मार्गदर्शन की विनती।
  • पीले रंग का स्मरण: माँ पीताम्बरा हैं, पीत वस्त्र धारण करने वाली। जप करते हुए मन में सुनहरे-पीले प्रकाश की कल्पना कई भक्तों को सहायक लगती है।
  • जप के बाद: कुछ क्षण बिना किसी शब्द के बैठें और केवल श्वास पर ध्यान दें।

ध्यान में मन भटके तो चिंता न करें। धीरे से उसे फिर मंत्र पर ले आएँ। यही अभ्यास है।

और पढ़ें: माँ बगलामुखी पीताम्बरा क्यों कहलाती हैं? · माँ बगलामुखी कौन हैं?

परिवार के साथ गायत्री जप

घर में सामूहिक जप बच्चों और बुज़ुर्गों, सबको जोड़ने का सरल तरीका है:

  • एक व्यक्ति पंक्ति बोले, बाकी दोहराएँ। इससे बच्चे उच्चारण सहज रूप से सीखते हैं।
  • अर्थ भी साथ पढ़ें। हर सप्ताह एक शब्द का अर्थ बच्चों को समझाएँ, जैसे "विद्महे यानी जानना"।
  • समय छोटा रखें। परिवार के साथ 11 बार पर्याप्त है; महत्व भाव का है, संख्या का नहीं।
  • अंत में आरती या चालीसा जोड़ सकते हैं, और पीला प्रसाद बाँटें।

और पढ़ें: बगलामुखी चालीसा: अर्थ और पाठ विधि · माँ बगलामुखी के 108 नाम

आम गलतियाँ जिनसे बचें

  1. बिना ध्यान दिए पंक्तियों में जल्दबाज़ी करना।
  2. एक ही साधना में अलग-अलग पाठ मिलाना। एक स्वरूप चुनें और उसी पर टिके रहें।
  3. इसे परिणाम पाने का सूत्र मानना। यह ज्ञान, ध्यान और मार्गदर्शन की प्रार्थना है।
  4. क्रोध या दुर्भावना के साथ जप करना। माँ की उपासना स्थिरता और भलाई के लिए है, किसी को हानि पहुँचाने के लिए कभी नहीं।
  5. बिना गुरु के गायत्री की जगह निश्चित संख्या की मूल मंत्र साधना शुरू करना।

आचार्य आशीष शर्मा के बारे में

आचार्य आशीष शर्मा 25 वर्षों से अधिक समय से माँ बगलामुखी की परंपरा में सेवा कर रहे हैं। वे संस्कृत में प्रशिक्षित हैं और जन्म से इस परंपरा से जुड़े हैं। उनका कार्यालय माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा के पास है। वे पारंपरिक माँ बगलामुखी पूजा, हवन और विशेष अनुष्ठान करते हैं, और भारत तथा विश्वभर के परिवारों को उनकी परिस्थिति के अनुसार व्यक्तिगत आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं।

आचार्य आशीष शर्मा, माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बगलामुखी गायत्री मंत्र क्या है?

इसका एक व्यापक रूप से जपा जाने वाला स्वरूप है: "ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥"

बगलामुखी गायत्री का अर्थ क्या है?

"हम माँ बगलामुखी को जानें, हम उन पर ध्यान करें जो स्थिरता प्रदान करती हैं, और वे देवी हमें प्रेरित करें तथा मार्ग दिखाएँ।"

क्या बिना दीक्षा बगलामुखी गायत्री जप सकते हैं?

इसे भक्ति-मंत्र के रूप में व्यापक रूप से जपा जाता है। किसी भी निश्चित संख्या की साधना या मूल मंत्र के लिए परंपरा गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक मानती है।

इसे कितनी बार जपना चाहिए?

प्रतिदिन ग्यारह बार अच्छी शुरुआत है; गुरुवार, अष्टमी या पर्व के दिनों में 108 बार (एक माला)।

इसे जपने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

गायत्री मंत्रों के लिए सूर्योदय पारंपरिक समय है; गुरुवार, अष्टमी और नवरात्रि विशेष उपयुक्त हैं।

क्या बगलामुखी गायत्री और मूल मंत्र एक ही हैं?

नहीं। गायत्री तीन पंक्तियों की भक्ति-प्रार्थना है; मूल मंत्र माँ का प्रधान मंत्र है, जो परंपरा से गुरु से प्राप्त किया जाता है।

कौन-सी माला प्रयोग करें?

माँ बगलामुखी के लिए हल्दी की माला पारंपरिक है, पर भक्ति-जप के लिए कोई भी स्वच्छ माला, या साधारण गिनती भी ठीक है।

क्या गायत्री जप से परिणाम की गारंटी होती है?

नहीं। यह ज्ञान, ध्यान और मार्गदर्शन की प्रार्थना है। परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

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